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JNU विवाद पर कुलपति का बड़ा बयान, कुछ लोग पूरे विश्वविद्यालय की पहचान नहीं

Satyakhabarindia

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हाल ही में लगे राजनीतिक नारों को लेकर उठे विवाद के बीच विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संतिश्री धुलीपुड़ी पंडित ने स्थिति पर स्पष्ट और संतुलित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ गिने चुने लोगों की गतिविधियों से पूरे विश्वविद्यालय की पहचान तय नहीं की जा सकती। उनका कहना था कि हर बड़े शिक्षण संस्थान में कुछ अतिवादी सोच रखने वाले लोग हो सकते हैं लेकिन वे पूरे संस्थान का प्रतिनिधित्व नहीं करते। कुलपति ने यह भी स्पष्ट किया कि जेएनयू की मूल आत्मा देशहित और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि जेएनयू को बदनाम करने की कोशिशें नई नहीं हैं लेकिन सच्चाई यह है कि यह विश्वविद्यालय हमेशा बौद्धिक विमर्श और लोकतांत्रिक मूल्यों का केंद्र रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जेएनयू को किसी एक घटना या नारे के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।

नारों के बाद 24 घंटे में सामान्य हुआ परिसर

कुलपति ने बताया कि हालिया नारेबाजी की घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर महज 24 घंटे के भीतर पूरी तरह सामान्य हो गया था। उन्होंने कहा कि फिलहाल कैंपस पूरी तरह शांतिपूर्ण है और शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य रूप से चल रही हैं। यह बयान उस समय आया जब कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाए गए थे। यह नारेबाजी उस वक्त हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी पूर्व जेएनयू छात्रों उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था। यह प्रदर्शन साबरमती ढाबा पर 5 जनवरी 2020 को हुई हिंसक घटना की बरसी के मौके पर आयोजित किया गया था। कुलपति ने साफ कहा कि इस तरह की घटनाओं को बढ़ा चढ़ाकर पेश कर पूरे विश्वविद्यालय की छवि खराब करना गलत है।

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जेएनयू की वैश्विक पहचान और राष्ट्रवादी छवि

अपने संबोधन में कुलपति संतिश्री पंडित ने जेएनयू को देश का सबसे राष्ट्रवादी विश्वविद्यालय बताया। उन्होंने कहा कि जेएनयू सिर्फ एक शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि एक वैश्विक ब्रांड है। यहां जो कुछ भी कहा और किया जाता है उसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि जेएनयू के छात्र और शिक्षक दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। यही वजह है कि जेएनयू में होने वाली हर घटना पर देश और दुनिया की नजर रहती है। कुलपति ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में वैचारिक विविधता हमेशा रही है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जेएनयू राष्ट्र विरोधी है। उन्होंने कहा कि आलोचना और असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है लेकिन इसकी एक मर्यादा होनी चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन इस बात को सुनिश्चित करता है कि कैंपस में कानून व्यवस्था बनी रहे और शिक्षा का माहौल प्रभावित न हो।

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सम्मेलन में अवैध घुसपैठ पर गंभीर चर्चा

कुलपति संतिश्री पंडित यह बयान ‘द एम साइलेंट इनवेजन: मुंबई में अवैध घुसपैठ’ विषय पर आयोजित एक सम्मेलन के दौरान दे रही थीं। इस सम्मेलन में बांग्लादेश और म्यांमार से हो रही अवैध घुसपैठ उसके कारण हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव और नागरिक संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में प्रसिद्ध फिल्म निर्माता विपुल शाह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि अवैध घुसपैठ केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं है बल्कि यह रोजगार शिक्षा स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर भी गहरा असर डालती है। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों का काम केवल शिक्षा देना नहीं बल्कि देश से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर विमर्श करना भी है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे विषयों पर खुली चर्चा से ही समाज को सही दिशा मिलती है और यही जेएनयू की असली पहचान है।

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